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114. नाम जप का सामर्थ्य क्या है ?

कलियुग में प्रभु के नाम की महिमा नामी यानी प्रभु के बराबर की है । इसलिए प्रभु का नाम कैसे भी लिया जाए वह तो मंगल-ही-मंगल करता है । जो सामर्थ्य प्रभु का है वही सामर्थ्य प्रभु नाम का भी है । प्रभु नाम जापकों ने नाम जप के प्रभाव से प्रभु की प्राप्ति भी कलियुग में की है, ऐसे एक नहीं अनगिनत उदाहरण शास्त्रों और श्री भक्तमालजी में मिलेंगे ।

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